Saraswati Chalisa in Hindi – श्री सरस्वती चालीसा

श्री सरस्वती चालीसा
Saraswati Chalisa in Hindi
श्री सरस्वती चालीसा विद्या और ज्ञान की देवी माँ सरस्वती की स्तुति में रचित है। माँ सरस्वती वीणा वादिनी, हंसवाहिनी और श्वेत वस्त्रधारिणी हैं। इस चालीसा का पाठ करने से बुद्धि, विद्या और वाणी में निपुणता प्राप्त होती है।
॥ दोहा ॥
जय जय सरस्वती भवानी। जय जय ज्ञान दायिनी प्राणी॥
जगत माता विद्या की दाता। तुम बिन ज्ञान न किसको आता॥
॥ चौपाई ॥
जय जय जय वीणापाणि माता।
जय शारदे तू विश्व विख्याता॥ 1 ॥
चतुर्भुज शोभित परम सुहाई।
वीणा पुस्तक धारण कराई॥ 2 ॥
श्वेत वस्त्र धर हंसवाहिनी।
शुभ्र वर्ण तू ज्ञान विधायिनी॥ 3 ॥
एक हाथ वीणा को धारे।
दूजे हाथ पुस्तक अति प्यारे॥ 4 ॥
तीजे हाथ कमंडल सोहे।
चौथे हाथ की माला मोहे॥ 5 ॥
कमल पुष्प पर शोभित तेरा।
सब विद्यार्थी करें तव सेवा॥ 6 ॥
जो तव ध्यान धरे मन माहीं।
ताके कछु अज्ञान न राहीं॥ 7 ॥
तुम ब्रह्माणी तुम भगवती।
तुम जगदम्बा ज्ञानदायनी॥ 8 ॥
तुमरी शरण गहे जो कोई।
तारिए ताहि सरस्वती होई॥ 9 ॥
विद्या बुद्धि तुम्हीं से पावे।
तुम्हरो यश सब जगत सुहावे॥ 10 ॥
तू विद्या की देवी कहावे।
मूढ़ जन को ज्ञान सिखावे॥ 11 ॥
ब्रह्मलोक में तुम्हरो निवासा।
सकल देव करें तव आसा॥ 12 ॥
वेद पुराण तुम्हीं ने रचाये।
लोक लोक में ज्ञान फैलाये॥ 13 ॥
संगीत साहित्य कला दायिनी।
सब विधि तुम जग में सुखदायिनी॥ 14 ॥
ऋषि मुनि सब तव गुण गावें।
ध्यान धरत तव रूप ध्यावें॥ 15 ॥
चौसठ कला जगत में जेती।
सकल तुम्हारी कृपा से होती॥ 16 ॥
शास्त्र ज्ञान तुम्हीं से आये।
शिष्ट जनों को मार्ग बताये॥ 17 ॥
अक्षर अक्षर तुमसे जानें।
सृष्टि सकल तुमको पहचानें॥ 18 ॥
तुम बिन सब जग बोबा होई।
तुम सबमें समाई सब कोई॥ 19 ॥
हंसवाहिनी ज्ञान विहारी।
तुम बिन कवि कोई नहिं प्यारी॥ 20 ॥
कवि कोविद जो तुमको ध्यावें।
सहज वचन शुभ ज्ञान सुनावें॥ 21 ॥
जगत माहि विद्या तुम दीन्हीं।
बुद्धिहीन को बुद्धि प्रदीन्हीं॥ 22 ॥
सुर नर मुनि सब तुमको ध्यावें।
ज्ञान प्रकाश सबहि तुम पावें॥ 23 ॥
जब जब शरण तुम्हारी आवें।
सो सो विद्या तत्व बतावें॥ 24 ॥
तुम गायत्री महामंत्र की माता।
तुम ही विश्व रचना विधाता॥ 25 ॥
सावित्री तुम सत्य स्वरूपा।
नित नव ज्ञान प्रकाश अनूपा॥ 26 ॥
तुम बिन जगत अंधकार में सोवे।
ज्ञान प्रकाश कहाँ से होवे॥ 27 ॥
तुम प्रकट भईं जब जग माहीं।
तब अज्ञान तिमिर सब जाहीं॥ 28 ॥
कालिदास जो तव गुण गाये।
उत्तम कवि की पदवी पाये॥ 29 ॥
तुलसी सूर सिंह बुद्ध गाये।
तव प्रसाद से कवित्त बनाये॥ 30 ॥
तानसेन को संगीत सिखायो।
सूरदास को भक्ति दिलायो॥ 31 ॥
जगत पिता ब्रह्मा शिर नाये।
तव महिमा वेदन में गाये॥ 32 ॥
हरि हर विरंचि तव गुण गावें।
रवि शशि दिग्पाल शीश नवावें॥ 33 ॥
विद्यार्थी जो तव ध्यान लगावें।
परीक्षा में सफलता पावें॥ 34 ॥
वाणी मधुर होय जग जाना।
सत्य वचन बोले गुणवाना॥ 35 ॥
विवाद विजय तुम्हारी माया।
सभा मध्य शुभ वचन सुनाया॥ 36 ॥
कवित्त कला संगीत सुहावन।
तव कृपा से होत सुख पावन॥ 37 ॥
मंद बुद्धि तरसें सब कोई।
तव कृपा से तीक्ष्ण मति होई॥ 38 ॥
ध्यावें तुमको जो नर मनसा।
उन पर कृपा करो माँ हंसा॥ 39 ॥
पुत्र विद्यावान करो माता।
कृपानिधान दुख हरो विधाता॥ 40 ॥
॥ दोहा ॥
सरस्वती चालीसा पढ़े, भक्ति ज्ञान वरदान।
विद्या बुद्धि प्रदायिनी, बनें सफल इंसान॥
सरस्वती चालीसा पढ़ने के लाभ (Benefits of Saraswati Chalisa)
- विद्या, बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि होती है।
- वाणी में मधुरता और प्रभाव आता है।
- परीक्षा, प्रतियोगिता और साक्षात्कार में सफलता मिलती है।
- कला, संगीत और साहित्य में निपुणता प्राप्त होती है।
- स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ती है।
- वाद-विवाद और भाषण में विजय प्राप्त होती है।
सरस्वती चालीसा कब पढ़ें? (When to Read Saraswati Chalisa)
- प्रतिदिन प्रातःकाल पूजा के समय पाठ करें।
- बसंत पंचमी के दिन पाठ करना अत्यंत शुभ है।
- परीक्षा से पहले नियमित पाठ करने से विशेष लाभ मिलता है।
- किसी भी नई विद्या या कला सीखने से पहले पाठ करें।
- बुधवार को पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है।
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